मानव क्रोध, भय, तनाव, असमंजस, प्रसन्नता के द्वारा प्रतिरोध को अनुभव करता है। साथ ही वह यह देख सकता है कि वह क्रोध, भय इत्यादि को अनुभव कर रहा है। यह देखना आपको मूल प्रतिरोध से मिला देता है जिस के द्वारा जीवन, मन चल रहा है, को दिखा देता है। भ्रम यह हो जाता है, जैसे कि प्रसन्नता इत्यादि स्वीकार्य है और क्रोध, भय इत्यादि अस्वीकार्य है। इस पक्षपाती व्यवहार को रोकना आपको मूल से मिला देता है।
Y V Chawla
Hindi Book तर्क से आगे






Written
on मई 16, 2013