विवशता, आराम और साम्यावस्था

हमने अपनी दिनचर्या को विवशता (काम, नौकरी इत्यादि) और आराम देने वाली क्रियायों (मनोरंजन, नशे, छुट्टियों, धार्मिक – आध्यात्मिक क्रियायों इत्यादि) में बांटा हुआ है. जब तक आप इस अंतर को नहीं देखते, समाप्त करते – आप साम्यावस्था में नहीं आ सकते. आप अपने काम से बंधे हुए हैं, अपने काम से विवशता पूर्वक बंधे … पढ़ना जारी रखें विवशता, आराम और साम्यावस्था

क्या परमात्माको देखा जा सकता है

क्या आप देख सकते हैं कि इन्द्रियों का क्षेत्र और विचार, अतीत, कल्पना का क्षेत्र पूर्ण क्षेत्र है? आप जहां भी जाएं, यह क्षेत्र ही रहता है। --आप पूर्ण क्षेत्र को परमात्मा का नाम दे सकते हैं. लेकिन इसको आप अपने से अलग करके नहीं देख सकते. https://youtu.be/SJN4Za_Hpdw

अनिश्चितता और भय

हम भय को मन से बाहर फैंकना चाहते हैं. डर को मन से बाहर नहीं फैंका जा सकता. कुछ भी मन से बाहर फैंका नहीं जा सकता. जब आप यह देख लेते हैं, भय, दुविधा, अनिश्चित्तता मन को चलाने, जीवित रखने के लिए ऊर्जा की तरह काम करते हैं. अगर आप इस पल शारीरिक तौर … पढ़ना जारी रखें अनिश्चितता और भय

काम और मनोरंजन

आप अपने काम से बंधे हुए हैं, अपने काम से विवशता पूर्वक बंधे हुए हैं क्योंकि आपने काम की विवशता को ढ़कने के लिये अपने आपको मनोरंजन, नशे, धार्मिक-आध्यात्मिक क्रियाओं के आराम से बांधा हुआ है| जब आप इस संबंध को देखते हैं, ऊर्जा एकत्रित होने लगती है| काम एक विवशता के रूप में समाप्त … पढ़ना जारी रखें काम और मनोरंजन

महान कार्य

दो तरह के लोग हैं: जो धार्मिक-आध्यात्मिक ‌‍सिद्धांतों या विचारों से जुडे हुए हैं, उन्होंने अपने जीवन को उन धार्मिक-आध्यात्मिक ‌‍सिद्धांतों, विचारों, क्रियाओं, व्यवहार संबंधी विधियों के दायरे में बंधा हुआ है. उनकी तलाश उन दर्शनों, जीवन के बाद के सिद्धांतों इत्यादि तक ही सीमित रहती है. वो इन सिद्धांतों द्वारा अपने आपको नुकसान, अपमान, … पढ़ना जारी रखें महान कार्य

क्या परमात्मा केवल अनुभव की चीज है या उसे देखा भी जा सकता है?

क्या आप देख सकते हैं की परमात्मा या ब्रह्माण्ड या अस्तित्व को किसने बनाया एक विचार की तरह ही उठता है? आपको मूल को देखने के लिए विचार की सीमा को देखना होगा. क्या आप देख सकते हैं कि आप और संसार , ब्रह्माण्ड एक प्रक्रिया है? आपके होने से ही संसार, ब्रह्माण्ड का अस्तित्व … पढ़ना जारी रखें क्या परमात्मा केवल अनुभव की चीज है या उसे देखा भी जा सकता है?

मूल का रहस्य

जब आप ‘जो भी आपको नापसंद हैं या आपको मानसिक बेआरामी देने वाला है या ऊट-पटांग है’ को बिना किसी विचार या व्याख्या के समाहित कर लेते हैं- आपने मूल के रहस्य को छू लिया है| Y V Chawla

संघर्ष के विचार का अंत

संघर्ष का विचार क्षीण होता जाता है - जब आप यह देखते हैं कि आप कल के भविष्य के, परिणाम के बारे में आज संतुष्ट या निश्चिंत नहीं हो सकते। जब आप यह देखते हैं के आप गलती करने के भय को हटा नहीं सकते। जब आप हानि, बेइज्जती, असफ़लता से होने वाली बेआरामी से … पढ़ना जारी रखें संघर्ष के विचार का अंत

ऐसा बुनियादी ज्ञान क्या है जो हर व्यक्ति को होना चाहिए?

इन्द्रियां देख, सुन, मह्सूस कर रही हैं। मन में अतीत, कल्पना और विचार चलते हैं। क्या आप देख सकते हैं कि इन्द्रियों का क्षेत्र और विचार, अतीत, कल्पना का क्षेत्र पूर्ण क्षेत्र है? आप जहां भी जाएं, यह क्षेत्र ही रहता है। जो भी आपके सामने इन्द्रियों के क्षेत्र में है, उसके अतिरिक्त सभी कुछ अतीत, कल्पना, विचार के … पढ़ना जारी रखें ऐसा बुनियादी ज्ञान क्या है जो हर व्यक्ति को होना चाहिए?

क्या आप भगवान के विचार को मान कर व्याख्या कर सकते हैं ?

Q. - भगवान के विचार को मन से निकालना बहुत मुश्किल है. क्या आप भगवान के विचार को मान कर व्याख्या कर सकते हैं ? Ans. - क्या आप देख सकते हैं कि आप और भगवान के संबंध को किसी सुखद अंत में बांधा नहीं जा सकता. क्योंकि बहुत कुछ ऐसा भी होता है जो … पढ़ना जारी रखें क्या आप भगवान के विचार को मान कर व्याख्या कर सकते हैं ?