जीवन के मूल असमंजस को किसी व्याख्या या उक्ति से हल नहीं किया जा सकता है

जीवन के मूल असमंजस को किसी व्याख्या या उक्ति से हल नहीं किया जा सकता है। यह ध्यान देने से ही ठहरता है।

आपको केवल एक ही कदम उठाना है। आपको पुस्तकों, गुरुओं, तकनीकों के द्वारा आपकी वर्तमान असंतोषजनक स्थिति के विपरीत जो आराम आपके सामने रखा जा रहा है, को चुपचाप बिना किसी प्रतिक्रिया के नकारना है।

क्या आप जीवन के मूल असमंजस को देख सकते हैं?

आपको क्यों बेआरामी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, अर्थात, उलझन, भय, शोक, कुछ भी जो आपको नापसंद है, इत्यादि। यह मानव के लिये मूल असमंजस है।

कोई भी बेआरामी या उलझन वाली परिस्थिति और अनिश्चितता आपकी मानसिक तंत्राओं में बेआरामी उत्पन्न करती है। आप इस बेआरामी को दिलासा देनेवाली व्याख्याओं या मनोरंजन या धार्मिक-आध्यात्मिक विचारों का सहारा लेकर मस्तिष्क से बाहर फेंकने की कोशिश करते हो। मन यह समझता है कि वो इस बेआरामी को हल कर लेगा। जब तक आप इस बेआरामी को ‘जैसे है वैसे ही’ नहीं अनुभव करते, ऊर्जा एकत्रित नहीं होती। आप मनोरंजन इत्यादि के मोह में फंस जाते हैं। जीवन की मूल ऊर्जा से आपका संपर्क छूटने लगता है।

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भगवान के अस्तित्व को कैसे स्वीकार करें?

आप भगवान की इच्छा और अपनी इच्छा में अंतर को महसूस करते हैं-मानसिक बेआरामी, मानसिक प्रतिरोध से| जब आप इस बेआरामी, इस प्रतिरोध को बिना किसी विचार या व्याख्या के समाहित कर लेते हैं-दो इच्छाओं का अंतर समाप्त हो जाता है|

दो इच्छाओं का विचार ही गिर जाता है|

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ब्रह्मांड के पार क्या है?

ब्रह्माण्ड या अस्तित्व को किसने बनाया, ब्रह्माण्ड के पार क्या है?
यह केवल एक विचार है।

क्या आप विचार की सीमा या विचार का कार्य देख सकते हैं?

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इस पल के साथ आपका संबंध कुछ और नहीं हो सकता (अपरिवर्तनीय है)

क्रोध, भय, चिंता, घृणा, तनाव, दुख, विचार की ऊहापोह जीवन की अभिव्यक्ति है.
इसी तरह सुख, प्रसन्नता, आनंद, विचार की ऊहापोह जीवन की अभिव्यक्ति है. क्रोध इत्यादि का अर्थ है, ‘जो है’ उसके साथ अस्वीकृति है.
सुख इत्यादि का अर्थ है, ‘जो है’ उसके साथ स्वीकृति है.
उदासीनता का अर्थ है. ‘जो है’ उसकी उपेक्षा.
यह तीनों अवस्थाएं जीवन की अभिव्यक्ति हैं. जीवन इन्हीं के द्वारा चलायमान रहता है.
इसलिये ‘जो है’ (उसके साथ अस्वीकृति, स्वीकृति, उदासीनता ) जीवन की अभिव्यक्ति है.
‘क्या होना चाहिए’ का विचार मन को ‘जो है’ उससे परे कर देता है.
मन इस भ्रम में रहता है कि वो जीवन की अभिव्यक्ति को अपने पक्ष में या वश में कर सकता है या वह किसी अभिव्यक्ति का चुनाव कर सकता है.
ऐसा कोई उपाय नहीं है न ही बच निकलने का कोई रास्ता है.
यह निस्सहायता आपको शून्यता का स्पर्श करा देती है.
आप जीवन का खेल समझने लग जाते हैं.Slide canva 6

सभी संभावनाएं और प्रतिरोध

हम समझते हैं जैसे कि वस्तुओं की अधिकता से, संबंधों के द्वारा, धार्मिक-आध्यात्मिक विचारों से, भगवान इत्यादि के विचारों के द्वारा स्थिरता पाई जा सकती है, या स्थिर आराम पाया जा सकता है- अगर अभी नहीं तो भविष्य में।

यह तलाश ह्में प्रतीक्षा में रखती है – हम पूर्ण अनुभव या प्रसन्नता को नहीं छू पाते।

ह्म नहीं देख पाते कि हम असमंजस, भय, अनिश्चितता से अपने आपको बचा रहे हैं। मन प्रतिरोध के द्वारा कार्य करता है – ‘यह नहीं जान सकता, यह नियंत्रित नहीं कर सकता’। यह देखना आपको पूर्ण शांति से मिला देता है – सभी संभावनाओं से मिला देता है। जीवन के बारे में सभी प्रश्न गिर जाते हैं।

अब आप स्वचालित धरातल पर आ जाते हो जहां अनिश्चितता, इच्छा आपकी इच्छा की पूर्ति, निश्चितता को प्रतिरोध प्रदान करते हैं|

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क्षमतायें ( Empowerment)

आपकी क्षमतायें अधिक जानने या अधिक वस्तुओं के होने से नहीं बढ़ती बल्कि यह अपने आप बढ़ जाती है-

जब आप यह देखते हैं कि आप कल के भविष्य के, परिणाम के बारे में आज संतुष्ट या निश्चिंत नहीं हो सकते।

जब आप यह देखते हैं के आप गलती करने के भय को हटा नहीं सकते।

जब आप हानि, बेइज्जती, असफ़लता से होने वाली बेआरामी से भाग नहीं सकते।

जब आप यह देखते हैं कि आप किसी भी गणना या प्रक्रिया के द्वारा निर्दोष चुनाव (flawless choice) करने में असमर्थ हैं।

जब आप रोज़मर्रा की मानसिक बेआरामी, खीझ, विवश्ता को  मनोरंजन, नशे, छुट्टियों, धार्मिक-आध्यात्मिक क्रियाओं से ढ़कने के आदी नहीं हो जाते।

ऊर्जा पूर्ण एकत्रित रहती है।

Y V Chawla

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