बेआरामी का अनुभव और पूर्ण ऊर्जा

आप अपने मन से बेआरामी के अनुभव होने को बाहर फेंकने की कोशिश करते हैं। कुछ भी दिमाग से बाहर नहीं फेंका जा सकता। पूरी ऊर्जा यहां है। 

आप अपने मन से बेआरामी के अनुभव होने को दूर फेंकने की कोशिश करते हैं। कुछ भी दिमाग से बाहर नहीं फेंका जा सकता। पूरी ऊर्जा यहां है।

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मूल प्रश्न, मूल दुविधा और मानसिक आराम देने वाले विचार

हम देखते हैं कि लोग निरंतर भगवान, धार्मिक क्रियाओं, कर्म, भाग्य, मुक्ति, सकरात्मक विचार, ध्यान इत्यादि की बातें करते हैं जैसे कि कोई अभ्यास, कोई सिद्धांत , कोई विचार आपको प्रतिरोध (बेआरामी और अनिश्चितता) से बचा सकता है।

यह सभी बातें और विचार केवल मानसिक आराम देने का काम करते हैं। मूल प्रश्न, मूल दुविधा दबी रह जाती है।

या तो आप इस बात को ध्यान पूर्वक (बिना कोई वैचारिक बहाना तलाश किये) देख सकते हैं या जब आपके ऊंचे विचार, आराम देने वाले विचार (चाहे वो धार्मिक-आध्यात्मिक ही हों) किसी वास्तविक, तकलीफ़देह, अडिग स्थिति के आमने-सामने खडे हो जाते हैं, तब आपकी ऊर्जा एकत्रित हो जाती है।

क्या आप इस समय जैसा है वैसे ही देख सकते हैं, जब आपके ऊपर कोई शारीरिक खतरा नहीं है, चाहे जितनी भी मुश्किल परिस्थिति है, चाहे कितना भी आपको नीचा दिखना पड रह है, चाहे आप कितना भी भय अनुभव कर रहे हैं, चाहे आप कितनी भी अनिश्चितता, उलझन अनुभव कर रहे हैं?

आप मूल धरातल पर हैं।

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जीवन के मूल असमंजस को किसी व्याख्या या उक्ति से हल नहीं किया जा सकता है

जीवन के मूल असमंजस को किसी व्याख्या या उक्ति से हल नहीं किया जा सकता है। यह ध्यान देने से ही ठहरता है।

आपको केवल एक ही कदम उठाना है। आपको पुस्तकों, गुरुओं, तकनीकों के द्वारा आपकी वर्तमान असंतोषजनक स्थिति के विपरीत जो आराम आपके सामने रखा जा रहा है, को चुपचाप बिना किसी प्रतिक्रिया के नकारना है।

क्या आप जीवन के मूल असमंजस को देख सकते हैं?

आपको क्यों बेआरामी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, अर्थात, उलझन, भय, शोक, कुछ भी जो आपको नापसंद है, इत्यादि। यह मानव के लिये मूल असमंजस है।

कोई भी बेआरामी या उलझन वाली परिस्थिति और अनिश्चितता आपकी मानसिक तंत्राओं में बेआरामी उत्पन्न करती है। आप इस बेआरामी को दिलासा देनेवाली व्याख्याओं या मनोरंजन या धार्मिक-आध्यात्मिक विचारों का सहारा लेकर मस्तिष्क से बाहर फेंकने की कोशिश करते हो। मन यह समझता है कि वो इस बेआरामी को हल कर लेगा। जब तक आप इस बेआरामी को ‘जैसे है वैसे ही’ नहीं अनुभव करते, ऊर्जा एकत्रित नहीं होती। आप मनोरंजन इत्यादि के मोह में फंस जाते हैं। जीवन की मूल ऊर्जा से आपका संपर्क छूटने लगता है।

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भगवान के अस्तित्व को कैसे स्वीकार करें?

आप भगवान की इच्छा और अपनी इच्छा में अंतर को महसूस करते हैं-मानसिक बेआरामी, मानसिक प्रतिरोध से| जब आप इस बेआरामी, इस प्रतिरोध को बिना किसी विचार या व्याख्या के समाहित कर लेते हैं-दो इच्छाओं का अंतर समाप्त हो जाता है|

दो इच्छाओं का विचार ही गिर जाता है|

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ब्रह्मांड के पार क्या है?

ब्रह्माण्ड या अस्तित्व को किसने बनाया, ब्रह्माण्ड के पार क्या है?
यह केवल एक विचार है।

क्या आप विचार की सीमा या विचार का कार्य देख सकते हैं?

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इस पल के साथ आपका संबंध कुछ और नहीं हो सकता (अपरिवर्तनीय है)

क्रोध, भय, चिंता, घृणा, तनाव, दुख, विचार की ऊहापोह जीवन की अभिव्यक्ति है.
इसी तरह सुख, प्रसन्नता, आनंद, विचार की ऊहापोह जीवन की अभिव्यक्ति है. क्रोध इत्यादि का अर्थ है, ‘जो है’ उसके साथ अस्वीकृति है.
सुख इत्यादि का अर्थ है, ‘जो है’ उसके साथ स्वीकृति है.
उदासीनता का अर्थ है. ‘जो है’ उसकी उपेक्षा.
यह तीनों अवस्थाएं जीवन की अभिव्यक्ति हैं. जीवन इन्हीं के द्वारा चलायमान रहता है.
इसलिये ‘जो है’ (उसके साथ अस्वीकृति, स्वीकृति, उदासीनता ) जीवन की अभिव्यक्ति है.
‘क्या होना चाहिए’ का विचार मन को ‘जो है’ उससे परे कर देता है.
मन इस भ्रम में रहता है कि वो जीवन की अभिव्यक्ति को अपने पक्ष में या वश में कर सकता है या वह किसी अभिव्यक्ति का चुनाव कर सकता है.
ऐसा कोई उपाय नहीं है न ही बच निकलने का कोई रास्ता है.
यह निस्सहायता आपको शून्यता का स्पर्श करा देती है.
आप जीवन का खेल समझने लग जाते हैं.Slide canva 6