विचारों की हवा

जब आप सुख (पसंद) और दुख (नापसंद) को विचारों की हवा नहीं देते हो तो आप मूल ऊर्जा को छू लेते हो जो रचना का आधार है।

Y V Chawla


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चुनाव

मन हमेशा एक तरफ खिंचा चला जाता है, किसी तथ्य को स्वीकार करने, नकारने या उपेक्षा करने में.

यह मन की कार्य प्रणाली है.

मन स्वीकारने, नकारने या उपेक्षा करने में संतुष्टि अनुभव करता है.

यह एक का चुनाव दूसरे दो की लागत पर करता है.

यह संतुष्टि मन का आधार है.

मन एक छाननी (चुनाव करना) की तरह काम करता है.

छानने की व्यर्थता को समझना, जानना पूर्णता की तरफ पहला और आखिरी कदम है.