मेडीटेशन

‘जो है’ और ‘जो आप सोचते हैं होना चाहिये’ के बीच के प्रतिरोध को बिना किसी आरामदायक विचार के सहन करना ही मूल बिंदु है।

यह किसी भी तथ्य या चुनौती का शब्दों के पीछे का (non-verbal) ज्ञान है।

इस प्रतिरोध को सहन करने को ही मेडीटेशन कहते हैं।

यह मस्तिष्क को एक नये और परिवर्तित आयाम में ले जाता है।

 

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बाहर का शोर और शांति

आपको लगता है कि जब बाहर सब ठीक या आपके मुताबिक होगा तो आप शांत होंगे और कुछ रचनात्मक कर सकेंगे।

यह प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं हो सकती।

जब आप बाहर के शोर से कोई प्रतिक्रिया नहीं करते, आप एकदम रुक जाते हो, शांत हो जाते हो।

सारा शोर एक लय में बदल जाता है।

हर पल सजग कर्म बन जाता है।

अस्तित्व का रहस्य उजागर होने लगता है।

वर्तमान का भूतकाल और भविष्य से संबध

वर्तमान का भूतकाल और भविष्य से संबध एक तनाव पूर्ण अवस्था में ही रहता है। मन इस प्रतिरोध को शब्दों द्वारा, व्याख्याओं द्वारा दूर हटाने में लगा रहता है। जीवन इसी प्रतिरोध से ही चलायमान रहता है।

इसको हटाया नहीं जा सकता। इस तथ्य को ध्यान से देखने पर अस्तित्व का रहस्य खुलने लगता है।