Monthly Archives: जून 2011

विचारों की खींचातानी

आपका सामर्थ्य विचारों की खींचातानी से सीमित हो जाता है । मुझे यह अवश्य चाहिए, मुझे अवश्य वहाँ तक पहुँचना है । अगर मिल जाता है तो भी ठीक है, नहीं मिलता तो भी ठीक है । विचार के दोनों … पढना जारी रखे

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पिंजरा

हम अपनी समस्याओं के समाधान खोजने में प्रसन्न हैं। इसका कोई अंत नज़र नहीं आता। यह एक माया जाल है जिसमें मानव मन जकड़ा है। जब आप समझ जाओगे कि आप कैद में हो; पिंजरा खुल जाएगा। बाध्यता समाप्त हो … पढना जारी रखे

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अनवरत ड्रामा

ब्रह्माण्ड एक अनवरत खेला जा रहा ड्रामा है, न कि किसी चलचित्र (movie) की तरह जिसका कोई सुखद अंत है।

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बाहर का शोर और शांति

आपको लगता है कि जब बाहर सब ठीक या आपके मुताबिक होगा तो आप शांत होंगे और कुछ रचनात्मक कर सकेंगे। यह प्रतीक्षा कभी समाप्त नहीं हो सकती। जब आप बाहर के शोर (कोई भी नापसंदगी) से कोई प्रतिक्रिया नहीं … पढना जारी रखे

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गलती करने का भय

मन इस भ्रम में रहता है कि वह कोई गलत फैसला ना कर ले। हम डरते हैं कि कुछ गलत ना हो जाए। हम (टैक्नीकल सहायता के अतिरिक्त) दूसरों के शब्दों से या दूसरों की सहायता से या अपने पिछले … पढना जारी रखे

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अज्ञात का भय

इस पल को भूतकाल के बोझ या अनुभव या इतिहास से मुक्त करके देखना ही रचना(creation) है। मन वस्तुओं, संबधों, घटनाओं, विचारों के द्वारा एक तयशुदा (defined) आराम चाहता है। यह अज्ञात को देखने से घबराता है। इस आराम को … पढना जारी रखे

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मन का भ्रम

मन इस भ्रम में रहता है कि: वो मानसिक संतुष्टि या आराम की अवस्था को जैसी वो चाहता है, पा सकता है या बनाये रख सकता है। वो सुख, प्रसन्नता या आनंद की अवस्थाओं को स्थायी कर सकता है और … पढना जारी रखे

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