विचारों की खींचातानी

आपका सामर्थ्य विचारों की खींचातानी से सीमित हो जाता है ।

मुझे यह अवश्य चाहिए, मुझे अवश्य वहाँ तक पहुँचना है ।

अगर मिल जाता है तो भी ठीक है, नहीं मिलता तो भी ठीक है ।

विचार के दोनों ध्रुव कमी के अहसास और कमी से समझौता करने से उत्पन्न होते हैं ।

मन के द्वारा उछाले गये पहलुओं को नकारना ऊर्जा का केंद्रित हो जाना है।

Advertisements

About yvchawla

http://www.fundamentalexpressions.com
यह प्रविष्टि psycho spiritual में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s