Monthly Archives: अक्टूबर 2011

मैं और जीवन ऊर्जा

जब आपको भूख लगती है तो केवल एक ही विचार भोजन का ही आता है। जब भोजन पेट में जाकर पाचन प्रक्रिया शुरू होती है तो मस्तिष्क भी काम करने को तैयार हो जाता है। विचार चलने शुरू हो जाते … पढना जारी रखे

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‘क्या करना चाहिये’ या ‘क्या नहीं करना चाहिये’

‘क्या करना चाहिये’ या ‘क्या नहीं करना चाहिये’ विचार की दुविधा है। मन ‘क्या करना चाहिये’ या ‘क्या नहीं करना चाहिये’ के द्वारा आराम, संतुष्टि की तलाश में रहता है। यह आराम ही भ्रम है। ’करना’ या ‘ना करना’ पूर्णता … पढना जारी रखे

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