विचार, सिद्धांत और कर्म

किसी विचार, ‘करना चाहिए’, या सिद्धांत के सहारे के बिना कर्म पूर्ण है। अन्यथा कर्म बंधन है। क्या आप कार्य करते हुए विचार, सिद्धांत या ‘करना चाहिए’ के आराम को नकार सकते हैं?

यहाँ आपकी वास्तविक ‘आप’ से मुलाकात होती है।

Y V Chawla

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आरामदायक सजगता

वर्तमान (यह पल) और भविष्य (अगला पल) एक तनावपूर्ण प्रक्रिया से बंधे हुए हैं। मन इस तनाव को हल करने, संतुष्ट करने का आराम ढ़ूंढता रहता है। यह प्रतिरोध, यह तनाव ही जीवन ऊर्जा है। जब मन यह देख लेता है कि इस प्रतिरोध को हल नहीं किया जा सकता, इसकी ऊहापोह, बेचैनी शांत हो जाती है। लेकिन साथ ही यह सजग हो जाता है क्योंकि यह नहीं जानता कि अगले पल में क्या होगा ।

आरामदायक सजगता मन की कार्यप्रणाली को पकड़ लेती है।

Fusion

 

पल की गति

जब आप किसी तथ्य या चुनौती को बिना दोष लगाये, बिना शिकायत किये, बिना आत्मग्लानि के देखते हैं तो उस पल स्वयं ही कर्म उजागर हो जाता है (कुछ करने या न करने के रूप में), यह पल की आणविक गति है।

जब आप दोष लगाकर, शिकायत करके या आत्मग्लानि से देखते हैं तो भी कर्म उजागर होता है, लेकिन आपका ध्यान उस पल में अनुभव की गई कमीं को संतुष्ट करने में लग जाता है।

पल की आणविक गति को देखना अपने आप में आनंद है।

यह आपका पूर्ण से संबंध है।

Y V Chawla