सुख- दुख की प्रक्रिया से निकलने का कोई रास्ता नहीं है

सत्य या भगवान को जानने के नाम पर मन एक आरामदायक अवस्था की तलाश में ही रहता है। यह मन की सीमा है। वह इससे आगे चाह ही नहीं सकता, जान ही नहीं सकता। मन इस भ्रम में रहता है जैसे सुख दुख को ढ़क सकता है। सत्य को जानने का अर्थ उस तल को देखना है, जहाँ सुख और दुख मित्र और पराये की तरह नहीं हैं अपितु मस्तिष्क को चलाने के लिये विषम ऊर्जा की तरह हैं। मन इस प्रक्रिया से बंधा हुआ है। यह देखना कि इस प्रक्रिया से निकलने का कोई रास्ता नहीं है, आपको असीमित से मिला देता है।

Y V Chawla

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स्वचालित मूल

मन दुख और विवशता के विरोध में ही संतुष्टि, प्रसन्नता का अनुभव कर सकता है। यह मन का बंधन है, प्रोग्राम है। मन इस भ्रम में आ जाता है जैसे कि संतुष्टि या प्रसन्नता ठहर जाएगी या ठहर सकती है।

इस बंधन का ध्यान में आना आपको स्वचालित मूल तक ले जाता है।

Y V Chawla

Fusion

हर पल जीवंत, सक्रिय और नया है

हर पल जीवंत, सक्रिय और नया है। किसी भी अभ्यास, तकनीक या प्रतीक्षा से इस तथ्य को जानना इस पल के जीवंत, सक्रिय और नया होने को नकारना है।

Fundamental Expressions