स्वचालित मूल

मन दुख और विवशता के विरोध में ही संतुष्टि, प्रसन्नता का अनुभव कर सकता है। यह मन का बंधन है, प्रोग्राम है। मन इस भ्रम में आ जाता है जैसे कि संतुष्टि या प्रसन्नता ठहर जाएगी या ठहर सकती है।

इस बंधन का ध्यान में आना आपको स्वचालित मूल तक ले जाता है।

Y V Chawla

Fusion

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About yvchawla

http://www.fundamentalexpressions.com
यह प्रविष्टि psycho spiritual में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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