Monthly Archives: मार्च 2012

दुख और अनिश्चितता का प्रतिरोध

दुख और अनिश्चितता के प्रतिरोध को समाप्त नहीं किया जा सकता। इनको अपने अंदर सम्माहित करने में ही सारा रहस्य है। मन सुख और दुख को विचारों की हवा(कैसे, क्यों) देता रहता है, इसी चक्र में यह फंसा रहता है। … पढना जारी रखे

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पूर्णसंतुष्टि

मन वस्तुओं, संबधों, घटनाओं या विचारों से एक संतुष्टिपूर्ण या आरामदायक स्थिति की तलाश में रहता है। कुछ भी आपको संतुष्टि या आराम नहीं दे सकता। आप संसार से एक क्रियाशील व्यवस्था से बंधे हैं न कि संतुष्टिपूर्ण या आरामदायक … पढना जारी रखे

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सत्य को जानना किसी डिग्री या प्रमाण-पत्र की तरह नहीं है

सत्य को जानना किसी डिग्री या प्रमाण-पत्र की तरह नहीं है। यह किसी तथ्य या चुनौती को बिना ‘कैसे और क्यों’ के सहारे के देखना है। यह देखना ही कर्म (action) है। Y V Chawla

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