कमी का अहसास

मन अपने अंदर कमी के अहसास को सच मान कर, उसको भरने के लिये भगवान, आत्मा, मुक्ति आदि विचारों की तरफ भागता है। इस भागने को देखना मन का यह खेल समाप्त कर देता है।

Y V Chawla

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सुरक्षित आश्रय का भ्रम

मन को विश्रांति की अवस्था में स्थिर नहीं किया जा सकता।

मन सदैव विचारों, व्याख्यायों, परिणामों, निष्कर्षों द्वारा  एक सुरक्षित आश्रय की तलाश में रहता है।

यह आश्रय ही भ्रम है।

Y V Chawla