Monthly Archives: मई 2012

तनाव

मन इसलिये तनाव में रहता है क्योंकि वह तर्क, नियमों, कारणों और परिणामों की व्याख्यायों के द्वारा संतुष्टि ढ़ूंढता रहता है या कर्म और परिणाम को किसी फार्मूले में बांधना चाहता है। हर पल अव्यक्त से आता है। अब मन … पढना जारी रखे

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प्रसन्नता

आप तभी प्रसन्न रह सकते हैं जब आप विरोधाभास, अस्पष्टता, नकारत्मकता, अनिश्चितता के साथ सहज हैं। Y V Chawla

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नया आयाम

सत्य को जानने मात्र से ही आपका संसार एक नये आयाम में आ जाता है। Y V Chawla

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कर्म की गति

हर कर्म के दो हिस्से होते हैं। एक सनसनी वाला (मैंने किया है, मैं कर सकता हूँ, ऐसा कैसे हुआ–) और दूसरा कर्म की वास्तविक गति। हमारी ऊर्जा सनसनी वाले हिस्से में से संतुष्टि पाने में लग जाती है, बजाए … पढना जारी रखे

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