स्वाद का विचार

इन्द्रियाँ भौतिक वस्तुओं के स्वाद का आनंद उठाती हैं, जो कि प्राकृतिक है | यह आपको कभी नहीं बांधेगा। जब वह चीज़ नहीं होगी तो आनंद भी नहीं होगा।
केवल स्वाद का विचार ही आपको बांधता है। स्वाद के विचार का आनंद क्यों न लिया जाए? आप इसका आनंद ले सकते हो, परंतु सावधान, यह मात्र आपके नकारने की स्थिति से संबंधित है। स्वाद के विचार से आनंदित होने के लिए आपको बार-बार स्वयं को नकारात्मक स्थिति में लाना होगा।
यह सभी अनुभवों पर लागू होता है।
इस बात का आपके ध्यान में आना आपको स्वचालित मूल से मिला देता है।

Y V Chawla
Fundamental Expressions on the Facebook

Advertisements

अद्वैत और प्रतिरोध

अद्वैत को अनुभव करने का अर्थ है – द्वैत, जीवन प्रतिरोध से ही चलायमान रहता है। आप और दूसरों के बीच में प्रतिरोध, अब और भविष्य के बीच में प्रतिरोध को हल नहीं किया जा सकता, न ही मिटाया जा सकता है। परिणाम को नियंत्रित करने, दूसरों को नियंत्रित करने का आराम ही भ्रम है। मन इस प्रतिरोध को हल करने में लगा रहता है।
यह जानना कि इस प्रतिरोध को मिटाने का कोई हल नहीं है, आपको अपने आप से मिला देता है, यह ही परमशांति है। आप स्वचालित ऊर्जा से एक हो जाते हैं।

Y V Chawla

परम शांति

आप परम शांति (supreme relaxation) को तब नहीं पाते है, जब आप भविष्य के बारे में निश्चित हो जाते हैं। परंतु तब पाते हैं, जब आप यह देख लेते हैं कि भविष्य या कल के बारे में निश्चित या पक्का होना मन को उस काम में लगाना है जो उसका है ही नहीं। अब कर्म क्रीड़ात्मक (ambling)बन जाता है।

Y V Chawla

Click for Slide Show