आप और मूल का स्पर्श

किसी कार्य में आपका उत्साह इसलिये नहीं होता है कि यह अच्छा है, बल्कि इसलिये कि आपने इसे करने का चुनाव किया है। किसी शारीरिक खतरे से निपटने के अतिरिक्त, आप हमेशा चुनाव ही कर रहे हैं। आप इसे विचारों, ‘करना चाहिये’, विवशता, किसी सिद्धांत से जोड़ देते हैं जैसे इस कारण से यह कार्य अच्छा है। यह देखना कि यह कार्य आपका चुनाव है-अंतिम(final) है- मूल को स्पर्श करना है। अब आप मूल के रहस्य के समीप आ जाते हैं।

Y V Chawla

Fundamental Expressions

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स्वचालित स्कीम

आप वस्तुओं, संबंधों और विचारों में वृद्धि से आनंद में नहीं आ सकते। आप तभी आनंद में आ सकते हो, जब आप यह देख लेते हो कि ब्रह्माण्ड (आप और जो आपके सामने हो रहा है या आप जो अनुभव कर रहें हैं) एक स्वचालित स्कीम है।

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चिंता और अनिश्चितता को मिटाने का भ्रम

मन पूर्ण संतुष्टि की अवस्था को नहीं जानता। यह केवल ‘चिंता और अनिश्चितता’ से बचने या उसको मिटाने का आराम ढूंढता रहता है। यह इसी आराम को स्थिर करने की आशा में रहता है और इसी भ्रम में उलझा रहता है जब तक कि यह आशा भंग नहीं हो जाती। इस आशा का भंग होना आपको परमशांति से मिला देता है-स्वचालित मूल से मिला देता है।

Y V Chawla

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दुख का विचार

दुख का विचार तब उत्पन्न होता है, जब आप जो हो रहा है उसको किसी ‘कारण और परिणाम’ की परिभाषा में बांधना चाहते हैं या आप किसी परिस्थिति का आराम अभी अनुभव करना चाहते हैं जिसे अभी हल नहीं किया जा सकता।

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