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सत्य व्याख्या या विचार नहीं है

सत्य को किसी व्याख्या या विचार से नहीं जाना जा सकता। यह तब आप पर चोट के द्वारा उजागर होता है जब किसी नापसंद या पसंदीदा स्थिति का सामना करने पर सभी विचार या व्याख्यायें अचानक रुक जाती हैं। Advertisements

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मूल ऊर्जा

‘जो है’ और ‘जो आप सोचते हैं होना चाहिये’ के बीच के प्रतिरोध को बिना किसी आरामदायक विचार, बिना शब्दों के सहन करना मूल ऊर्जा को छू लेना है। Y V Chawla  

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