आरामदायक आश्रय में खलबली और मूल ऊर्जा

मूल ऊर्जा को किसी सकारात्मक व्याख्या या उक्ति से नहीं स्पर्श किया जा सकता। हमें अपने अंदर का प्रोग्राम देखना होगा। किसी नापसंदीदा स्थिति का सामना होते ही आप क्रोध, तनाव, भय, असमंजस अभिव्यक्तिओं से प्रतिक्रिया करते हैं। इन पलों में मन के आरामदायक आश्रय में खलबली मच जाती है। मन अपने इस आश्रय को ढूंढने, पकड़ने के लिये विचारो, व्याख्यायों से प्रयत्न करता है। इस प्रयत्न को देखना आप को मूल ऊर्जा से मिला देता है।

Y V Chawla

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अनुभव और स्थिरता का आराम

फंड़ामैंटल एक्सप्रैशंस आपको स्थिरता का आराम नहीं देता है। यह आपको दिखाता है कि अनुभवों के द्वारा स्थिरता का आराम संभव नहीं है। यकायक हर अनुभव ‘जीवंत’ हो जाता है, चाहे वह दुखदायी हो या सुखदायी। अब आप अपने से एक हो जाते हैं। पहले आप स्वयं को विचारों, सिद्धांतों, दर्शनों से मिला कर जीने की कोशिश कर रहे हैं।

Y V Chawla

मन इस भ्रम में रहता है

मन इस भ्रम में रहता है कि वो
अच्छे, बुरे में चुनाव का;
गल्ती ना करने का;
परिणाम या कल का;
संबधों के आपके अनुसार चलने का;
अपने विचारों को चुनौती ना मिलने का;
आराम पा सकता है।
यह आराम ही भ्रम है। यह कभी पाया ही नहीं जा सकता है।
इस आराम का आपके ध्यान में आना मस्तिष्क को नयीं ऊंचाई पर ले जाता है।
आपकी इच्छा का अर्थ बन जाता है।
Y V Chawla

स्थिरता का आराम

मन अनुभवों के द्वारा, तर्क के द्वारा, ज्ञान के द्वारा स्थिरता के आराम को पाना चाहता है। क्या आप देख सकते हैं कि यह आराम भ्रम है? आप ऐसे धरातल पर आ जाते हैं जो हर पल नया है।
Y V Chawla