संतोषजनक बिंदु की तलाश

हम अच्छे-बुरे में चुनाव के द्वारा, पसंद-नापसंद में चुनाव के द्वारा, भविष्य के द्वारा, परिणाम के द्वारा, संबंधों के द्वारा, विचारों के द्वारा, गलती ना करने के द्वारा – एक संतोषजनक बिंदु की तलाश में रहते हैं। क्या हम देख सकते हैं कि इस बिंदु को स्थिर नहीं किया जा सकता है? यह देखना आपको मूल से मिला देता है।

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Y V Chawla

Fundamental Expressions

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अनिश्चितता और भय को हल करने का आराम

आप इस पल सुरक्षित और सकुशल हैं। अब आप अनिश्चितता और भय, जो आपका मन अनुभव कर रहा है, को हल करने का आराम पाना चाहते हैं-यह आराम ही भ्रम है। अब आप स्वंय से जुड़ जाते हैं। अब हर कर्म रचनात्मक है।

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मानसिक स्वनिर्भरता

आपको केवल एक ही कदम उठाना है। आपको पुस्तकों, गुरुओं, तकनीकों के द्वारा आपकी वर्तमान असंतोषजनक स्थिति के विपरीत जो आराम आपके सामने रखा जा रहा है, को चुपचाप बिना किसी प्रतिक्रिया के नकारना है।

मानसिक स्वनिर्भरता तभी जागती है जब आप किसी आराम में बह जाने से रुक जाते हैं या किसी बेआरामी में ना शिकायत करते, ना दोष लगाते ना अपने को दोषी मानते हो।  मानसिक स्वनिर्भरता ऊर्जा का पूर्ण केंद्रित हो जाना है। यह आपका पूर्ण से संबंध है।

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असमंजस में स्पष्टता देखना मन का कार्य है

स्पष्टता दी हुई नहीं होती है। असमंजस में स्पष्टता देखना मन का कार्य है। अव्यवस्था में व्यवस्था देखना मन का कार्य है। इस कार्य को बंद नहीं किया जा सकता। जब आप असमंजस, अव्यवस्था (जिसका आप अनुभव कर रहे हैं) को नकारते या व्याख्याओं से परे नहीं हटाते-स्पष्टता, व्यवस्था स्वयमेव सामने आने लगती है। यह देखना आपको स्वचालित मूल से मिला देता है।

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