आसक्ति

किसी वस्तु, कार्य या स्थिति में आपकी आसक्ति, झुकाव इसलिये बढ़ जाता है जब आप किसी और कार्य को विवशता पूर्वक कर रहे होते हैं या आप जो परिस्थिति आपको नापसंद है उसकी बेआरामी से बचना चाहते हो।

यह आसक्ति ही शोक और संताप का कारण है। इस बात का आप के ध्यान में आना आपको मूल ऊर्जा से मिला देता है।

 Y V Chawla

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मानसिक बेआरामी

आप किसी व्यक्ति या परिस्थिति के कारण परेशान नहीं होते, बल्कि इसलिये कि आप मानसिक बेआरामी से बचना चाहते हो। यह बचना शिकायत करके, दोष लगा कर, अपने को दोषी मान कर या यह सोच कर कि भविष्य में सब ठीक हो जायेगा-के द्वारा होता है।

इस बचने के आराम को छोड़ना आपको मूल से मिला देता है।

Y V Chawla

Fundamental Expressions

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