अस्तित्व विस्मय की प्रक्रिया से चलता है

जब आपकी बनाई हुई योजनाएं पूरी नहीं होती तो आपका मन व्याकुल हो जाता है। यह पूर्ण विश्रांति को तब पाता है जब यह देख लेता है कि अस्तित्व विस्मय की प्रक्रिया से चलता है न कि केवल गणनाओं और तर्कों के द्वारा। और आप विस्मय की प्रक्रिया से अपने आप जुड़ जाते हैं जब आप किसी नापसंद स्थिति की बेआरामी से बच के नहीं निकलते।

Y V Chawla

http://www.amazon.com/Y-V-Chawla/e/B00AAOVR26/

Advertisements

पल की आणविक गति

जब आप किसी तथ्य या चुनौती को बिना दोष लगाये, बिना शिकायत किये, बिना आत्मग्लानि के देखते हैं तो उस पल स्वयं ही कर्म उजागर हो जाता है (कुछ करने या न करने के रूप में), यह पल की आणविक गति है।
जब आप दोष लगाकर, शिकायत करके या आत्मग्लानि से देखते हैं तो भी कर्म उजागर होता है, लेकिन आपका ध्यान उस पल में अनुभव की गई कमीं को संतुष्ट करने में लग जाता है।
पल की आणविक गति को देखना अपने आप में आनंद है।
यह आपका पूर्ण से संबंध है।

Y V Chawla

Image