अज्ञात अंतर और अनंत संभावनाएं

मन लगातार व्याख्यायों, निष्कर्षों द्वारा संतुष्टि पाने में लगा रहता है. यह करने (या न करने) और देखने कि क्या होता है, में संतुष्ट नहीं होता। यह अज्ञात अंतर को सहन करने से डरता है। यह अज्ञात अंतर अनंत संभावनाओं का धरातल है। मन व्याख्यायों और निष्कर्षों द्वारा निश्चितता और आराम (भ्रामक) को पकड़ कर रखता है। इस आराम को छोड़ना मन को एक अनिर्णीत अवस्था में ले जाता है। यह अवस्था ही आपका मूल से संबध है।

Y V Chawla
Image

Advertisements