सब कुछ क्रियाशील है

सब कुछ क्रियाशील है। कुछ भी संतोषजनक, अच्छा या अंतिम मानना मन को आराम का भ्रम देता है जो समय में कभी भी टूट जाएगा। इस तथ्य का आपके ध्यान में आना सभी कुछ ताज़ा और नया बना देता है। आराम सतर्कता में बदल जाता है- यह आपका मूल से संबंध है।

Y V Chawla
http://www.fundamentalexpressions.com/excerpts.htm

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