इस पल और अगले पल में अस्पष्टता

इस पल और अगले पल में अस्पष्टता को स्वीकारते ही मन पूर्ण विश्रांति की अवस्था में आ जाता है। अब आप जो भी कर रहे हैं उस में लगे हैं क्योंकि ऊर्जा अगले पल को पक्का करने, परिभाषित करने के आराम को पकड़ने में नहीं बिखरती। जबकि पहले विचार इस अस्पष्टता को ढ़कने, मिटाने में व्यस्त रहता है जैसे कि यह (विचार) नियंत्रक है। इस आराम को पकड़ना ही क्षीणता, असतर्कता, मृत्यु है।
Y V Chawla

http://www.fundamentalexpressions.com/excerpts.htm
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पूर्ण संतुष्टि और इच्छा

पूर्ण संतुष्टि और इच्छा

किसी भी इच्छा का पूरा होना न इच्छा को समाप्त कर सकता है और न ही पूर्ण संतुष्टि तक ले कर जा सकता है । किसी भी इच्छा का उठना और पूरा होना एक प्रक्रिया है, एक स्वचालित प्रक्रिया। पूर्ण संतुष्टि की प्रतीक्षा पल-पल इच्छा का उठना और पूरा होना की प्रक्रिया को देखने नहीं देती। जब आप हर पल हो रही इस प्रक्रिया को देखते हैं, पूर्ण संतुष्टि का विचार गिर जाता है, स्वचालित प्रक्रिया नज़र आने लगती है। और हर पल इस प्रक्रिया को आप तब देख सकते हैं जब आप किसी इच्छा के पूरा ना होने को किन्हीं विचारों, सिद्धांतों या दिलासे से नहीं बांधते।
Y V Chawla

Fundamental Expressions on Facebook

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क्या आप देख सकते हैं कि मन हमेशा बेआरामी की अवस्था में ही रहता है? मन की इस बेआरामी से एक होना आपको मूल से मेला देता है। अब हर कार्य तनावमुक्त, रचनात्मक, होशपूर्वक होता है। मन भ्रम के कारण (मानसिक) आराम को स्थिर करने में लगा रहता है या इस भ्रममें आ जाता है जैसे कि यह सुरक्षितहो गया है-यही क्षीणता, असतर्कता, मृत्यु है।
Y V Chawla