स्थिर आराम और संतुष्टि

जब आपको कोई वस्तु या धन मिलता है, यह संतुष्टि कुछ समय तक रहती है, जब कि वह वस्तु या धन अभी भी आपके पास है। मन को चलने के लिये, जीवित रहने के लिये नया तनाव, नया संवेग चाहिये। भ्रम यह हो जाता है जैसे कि कोई वस्तु या धन स्थिर आराम या संतुष्टि दे सकता है। इस तथ्य पर ध्यान देने से ही आप तनाव-आराम की पल-पल की स्वचालित गति को देख लेते हैं। स्थिर आराम एक भ्रम है। कुछ भी आपको स्थिर आराम या संतुष्टि नहीं दे सकता।

Y V Chawla

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दुविधा, बेचैनी और स्वचालित मूल

किसी तुरंत शारीरिक खतरे के अतिरिक्त सभी समस्याएं मानसिक (psychological) ही हैं। मन इस भ्रम में आ जाता है जैसे कि बाहरी तथ्यों या वस्तुओं, संबंधों को ठीक करके यह प्रसन्न, संतुष्ट, स्पष्ट हो जायेगा। किसी भी समस्या के कारण जो दुविधा, बेचैनी होती है, वह उसी क्षेत्र में (आपके अंदर) होती है, जिस पर केवल आपका अधिकार है। यह देखना कि इस बेचैनी के ऊपर कोई भी क्रिया नहीं की जा सकती, आपको पूर्ण विश्रांति से मिला देता है। आप स्वचालित मूल से
जुड जाते हैं। Y V Chawla

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