मूल असमंजस और आशा

हम, जो दूसरों ने किसी भी क्षेत्र में किया है या कर रहे हैं, से सम्मोहित हो जाते हैं| हम इस बहकावे में आ जाते हैं कि जैसे किसी ने जीवन के मूल असमंजस को हल कर लिया है| यह बहकावा मन को आराम, राहत, आशा मे रखता है, जैसे कि कहीं कोई पक्का हल है| क्या मन को इतना सक्रिय किया जा सकता है कि वो इस आराम, राहत, आशा की व्यर्थता को जान ले, देख ले? यह सक्रियता आपको एक अनिर्णीत क्षेत्र में ला खडा कर देती है जहां आपकी सभी निश्चिततायें और निष्कर्ष बह जाते हैं| आप अकेले हो जाते हैं| आपकी सभी बैसाखीयां (चाहे वो भगवान के विचार के रूप में हो या कोई और अंतिम सिद्धान्त के बारे में हो) ले ली जाती हैं| आप उस धरातल को जो आपके नीचे था नहीं देख पाते, आप नहीं जानते कि आप के नीचे कोई धरातल है भी कि नही| जीवन ऊर्जा स्वयं आपको पकड़ लेती है| आप स्वयं को अस्तित्व के पूरे क्षेत्र के रूप में देख लेते हैं|
Y V Chawla

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तनाव और शांति

प्रकृति और मन हमेशा तनाव में रहते हैं | मन इसलिए तनाव में रहता है क्योंकि यह नहीं जानता कि अगला पल किस तरह से आने वाला या खुलने वाला है | इस तनाव के साथ ही आराम से रहना आपको परम शांति से मिला देता है | आप सभी संभावनाओं से जुड जाते हैं |
Y V Chawla
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