असमंजस

The human predicament:
Slide 12Y V Chawla

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आप संपूर्ण जगत से जुड़े हुए हैं

जब आप देखते हैं कि आप संपूर्ण जगत से जुड़े हुए हैं चाहे कुछ आपको पसंद है या नापसंद, चाहे कुछ आपको भय देने वाला है या आपकी प्रशंसा का पात्र और आप उस नापसंदीदगी या परेशानी के अनुभव होने को विचारों से नहीं हटाते-आपको जीवन ऊर्जा का एक झटका लगता है, आपको मूल ने छू लिया है|
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नापसंदीदा विचार और मूल का स्पर्श

हम इस भ्रम में रहते हैं जैसे कि हम नापसंदीदा विचारों को हटा सकते हैं या समाप्त कर सकते हैं| नापसंदीदा विचार वो हैं जो कल के बारे में या दूसरों के बारे में किसी भय या अनिश्चितता से संबंधित हैं| इस पल जब आप सुरक्षित और सकुशल हैं-यह देखना कि इन विचारों का इस पल कुछ नहीं किया जा सकता, एक बहुत बड़ा कदम है| यह ऊर्जा का पूर्ण केंद्रित हो जाना है| नापसंदीदा विचारों को ‘जैसे हैं वैसे ही’ समाहित करने पर जो भी कर्म (या अकर्म) उजागर होता है, पूर्ण होता है| मन तुरंत कोई आरामदायक विचार या व्याख्या से नापसंदीदा विचारों के उठते ही उनको ढ़क देता है-मूल का स्पर्श हो ही नहीं पाता|

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