ऊर्जा का बिखराव

ऊर्जा विचारों के द्वारा, विचारों के द्वारा स्थिर आराम तलाश करने ( जो बीत गया वो अछ्छा था या भविष्य अछ्छा होगा) में बिखर जाती है| क्या आप यह देख सकते हैं? यह देखने से आप मूल धरातल को छू लेते हैं| अब आपकी कल्पना शक्ति (imagination) की कोई सीमा नहीं है|

Y V Chawla

https://sites.google.com/site/yvchawla/third-eye

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समस्यायें और आपकी दिनचर्या का सम्बंध

हम विवशता (काम, नौकरी इत्यादि) और आराम (मनोरंजन, छुट्टियां, धार्मिक क्रियायें इत्यादि) के ढांचे में बंधे रहते हैं| हम नहीं देखते कि यह ढांचा, यह झुकाव ही सभी समस्यायों का मूल है|
क्या सभी समस्यायें इस ढांचे को नकार कर समाप्त हो जांयेंगी?
देखो, आप फिर आराम ढूंढ़ रहे हो| जब आप ढांचे की वास्तविकता को देख कर नकार देते हैं-पूर्ण ऊर्जा केंद्रित हो जाती है| सभी प्रश्न गिर जाते हैं|
Y V Chawla

http://yvch.podomatic.com/