विचार और मन की सीमा और मूल ऊर्जा

मन भगवान, मुक्ति, आत्मा इत्यादि को जानने का प्रयत्न नहीं कर सकता| यह केवल अपनी इच्छा का पूरा होना ही चाहता है| यह केवल ‘इच्छा और उसका पूरा होने’ की भाषा में ही समझता है| जो भी आप कर रहे हैं या सोच रहे हैं, आप अपनी ज़रूरत या इच्छा के पूरे होने के बारे में ही प्रयत्न कर रहें हैं| विचार, मन इससे आगे जा ही नहीं सकता| यह स्पष्टता आपको स्वचालित मूल से मिला देती है| भ्रम यह हो जाता है कि किसी इच्छा के पूरे होने से पूर्ण संतुष्टि मिल जायेगी|

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http://www.speakingtree.in/public/spiritual-blogs/seekers/science-of-spirituality/content-390057

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