अस्पष्टता और अनिश्चिtतता में रुकने का रहस्य

मन अस्पष्टता और अनिश्चिtतता में रुकना नहीं चाहता| यह ‘जानने’ की संतुष्टि पाने में भागता रहता है| यह अस्पष्टता और अनिश्चिtतता के साथ रुकने के सामर्थ्य को, के रहस्य को नहीं जानता| इस सामर्थ्य को देखना आपको मूल से मिला देता है|

आगे देखने के लिये क्लिक करें:

http://www.speakingtree.in/public/spiritual-blogs/seekers/science-of-spirituality/t-440125

Y V Chawla

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