सभी संभावनाओं का मूल

चाहे आप दुख के बारे में बात कर रहे हैं, चाहे सुख के बारे में | चाहे आप खुशी के गीत गा रहे हो या गम के-आप आरामदायक धरातल पर ही हो| अगर ऐसा ना होता तो आप ना बात कर पाते, ना गाने गा पाते| यह धरातल ही सभी संभावनाओं का मूल है|

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आप वस्तुओं की अधिकता, भगवान इत्यादि के विचार के द्वारा, धार्मिक और आध्यात्मिक क्रियाओं के द्वारा क्या पाना चाहते हैं

जब तक आप इस बात को स्पष्ट तौर पर नहीं देख लेते कि आप वस्तुओं की अधिकता, भगवान इत्यादि के विचार के द्वारा, धार्मिक और आध्यात्मिक क्रियाओं के द्वारा क्या पाना चाहते हैं-आप सत्य को नहीं जान सकते| जैसे आप जीवन में आगे बढ़ते हैं, आप देखते हैं कि आप वस्तुओं, संबंधों, परिस्थितिओं, विचारों के द्वारा स्थिर मानसिक आराम पाना चाहते हैं| यह मन के ऊपर चोट की तरह है कि जो आप पाना चाहते हैं, वो हो ही नहीं सकता| मन अस्पष्टता और अनिश्चिtतता से ही जीवित रहता है| अब आप पूर्ण विश्रांति से, सभी संभावनाओं से जुड़ जाते हैं|

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