तनाव, डर या दुविधा – ऊर्जा का एकत्रित होना

जब कोई नापंसदीदा स्थिति सामने आती है-मन उसका सामना करने के लिये ऊर्जा एकत्रित करता है| यह ऊर्जा का एकत्रित होना तनाव, डर या दुविधा के रूप में होता है| फ़िर मन उसके हल होने का आनंद लेता है| मन ऊर्जा के एकत्रित होने को तनाव, भय या दुविधा का लेबल इसलिये लगाता है क्योंकि यह आरामदायक या सुप्त अवस्था में होता है, यह इस ऊर्जा के उठने के लिये तैयार नहीं होता|

DAKOTAक्या मन को इतना सक्रिय किया जा सकता है कि यह निरंतर चेतनता की अवस्था में रहे? अब आप क्रिया अवस्था में ही हैं चाहे आप कुछ कर रहें हैं या नही कर रहें हैं| आप सीमा रहित क्षेत्र में हैं| आप मूल धरातल पर हैं|

Y V Chawla

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