प्रतिरोध को दबाना और असतर्कता

मन के पास एक ही व्यस्तता है| यह चाहता है कि कोई भी समस्या इसे तंग न करे और जो यह चाहता है, इसे मिल जाये| इसका अर्थ यह है कि यह जो चाहता है उसमें कोई प्रतिरोध नहीं चाहता| जब आप इस प्रतिरोध को समाहित कर लेते हैं, आप पूर्ण धरातल पर हैं| प्रतिरोध को हटाना ही इसको पूर्ण से अलग कर देता है|
जो भी प्रतिरोध (मानसिक बेआरामी या अनिश्चितता के रूप में) आप अनुभव करते हैं- ‘नये’ का धरातल है, नयीं संभावनाओं की तरफ़ खुलता है| भ्रम के कारण हम प्रतिरोध को दबाने में व्यस्त रहते हैं-| परिणाम-असतर्कता और क्षीणता|

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Y V Chawla

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