निराशा, असुरक्षा और मूल

आप यह सोच कर कि यह आरामदायक, सुरक्षित, अच्छा, ठीक होगा-सत्य को, मूल को नहीं जान सकते| आपको निराशा को झेलने के लिये तैयार रहना होगा, अगर आप मूल को वास्तव में देखना चाहते हो| आपको बेआरामी, असुरक्षा, बुरे, गलत के लिये भी स्थान देना होगा|

Y V Chawla

s95

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