मूल प्रतिरोध और स्वचालित धरातल

मूल प्रतिरोध, जिससे जीवन चलायमान रहता है, को देख कर, जान कर आप मूल धरातल को छू लेते हैं| मन इस प्रतिरोध को टाल कर प्रसन्न होता रहता है| टालना, यह सोच कर होता है- अभी विवशता है, कल सब ठीक हो जाएगा या संतोषजनक हो जाएगा; किसी ने जीवन के प्रतिरोध को हल कर लिया है; वस्तुओं, संबंधों की अधिकता के द्वारा, धार्मिक, आध्यात्मिक विचारों या क्रियाओं के द्वारा स्थिर अनुभव या स्थिर आराम पाया जा सकता है| इस टालने को देखना ऊर्जा के द्वार खोला देता है|

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कोई भी उपदेश या क्रिया जो यह वायदा करते हैं की आपको स्थिर आराम, स्थिर प्रसन्नता मिल जाएगी-आपको मूल से दूर कर देते हैं| मन विषमताओं के द्वारा ही कार्य करता है| वस्तुओं की अधिकता से, ज्ञान के द्वारा या किसी अभ्यास से आप मानसिक तौर पर सुरक्षा, निश्चितता को नहीं बांध सकते| इस तथ्य पर ध्यान देने से आप स्वचालित धरातल पर आ जाते हो जहां अनिश्चितता, इच्छा आपकी इच्छा की पूर्ति, निश्चितता को प्रतिरोध प्रदान करते हैं| आप पूर्ण धरातल पर हैं|

Y V Chawla

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आपका साहस पूर्ण कदम किसी भी परिस्थिति में सहज रहना है

आपका कार्य किसी कठिन काम को करना या उलझन भरी समस्या को सुलझाना नहीं है| आपका साहस पूर्ण कदम किसी भी परिस्थिति में सहज रहना है| आप निश्चयात्मक रूप से सहज हो जाते हैं जब आप यह देख लेते हैं की कोई भी कठिनाई या समस्या मानसिक बेआरामी ही है (किसी तुरंत शारीरिक खतरे के अतिरिक्त) इस मानसिक बेआरामी को ‘जैसे है वैसे ही’ स्वीकार करना , समाहित करना ही कुंजी है| कार्य या हल स्वयमेव ही सामने आ जाता है या हो जाता है|

Y V Chawla

DAKOTA
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