आपका साहस पूर्ण कदम किसी भी परिस्थिति में सहज रहना है

आपका कार्य किसी कठिन काम को करना या उलझन भरी समस्या को सुलझाना नहीं है| आपका साहस पूर्ण कदम किसी भी परिस्थिति में सहज रहना है| आप निश्चयात्मक रूप से सहज हो जाते हैं जब आप यह देख लेते हैं की कोई भी कठिनाई या समस्या मानसिक बेआरामी ही है (किसी तुरंत शारीरिक खतरे के अतिरिक्त) इस मानसिक बेआरामी को ‘जैसे है वैसे ही’ स्वीकार करना , समाहित करना ही कुंजी है| कार्य या हल स्वयमेव ही सामने आ जाता है या हो जाता है|

Y V Chawla

DAKOTA
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