मन विषमताओं के द्वारा ही कार्य करता है

कोई भी उपदेश या क्रिया जो यह वायदा करते हैं की आपको स्थिर आराम, स्थिर प्रसन्नता मिल जाएगी-आपको मूल से दूर कर देते हैं| मन विषमताओं के द्वारा ही कार्य करता है| वस्तुओं की अधिकता से, ज्ञान के द्वारा या किसी अभ्यास से आप मानसिक तौर पर सुरक्षा, निश्चितता को नहीं बांध सकते| इस तथ्य पर ध्यान देने से आप स्वचालित धरातल पर आ जाते हो जहां अनिश्चितता, इच्छा आपकी इच्छा की पूर्ति, निश्चितता को प्रतिरोध प्रदान करते हैं| आप पूर्ण धरातल पर हैं|

Y V Chawla

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