मानसिक बेआरामी से बच के निकालने का कोई रास्ता नहीं है

आप किसी नापसंद अनुभव, मानसिक बेआरामी, मानसिक तौर पर तकलीफ़देह अवस्था का सामना करने से, उसको सहन करने से, किसी दूसरे के द्वारा, किसी क्रिया, किसी अभ्यास, किसी सिद्धांत के द्वारा नहीं बच सकते | जब तक आप यह नहीं देख लेते कि बच के निकालने का कोई रास्ता नहीं है, आप मूल को नहीं छू सकते|
आप नापसंद विचारों को अनदेखा कर देते या टालने में लगे रहते हो| नापसंद विचारों का बिना किसी व्याख्या के सामना करने से पूर्ण ऊर्जा एकत्रित हो जाती है|
Y V Chawla

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ब्रह्माण्ड एक दूसरे पर आश्रित, एक दूसरे के विरोधी तत्वों द्वारा चलायमान रहता है

असमंजस, विरोधाभास, अस्पष्टता:

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