जीवन कोई परिभाषित या सीमित प्रक्रिया नहीं है

आप संतुष्ट या स्थिर आराम की अवस्था में नहीं रह सकते| कोई कमी,कोई आवश्यकता, कोई असुरक्षा आपके सामने आ जाएगी| जीवन कोई परिभाषित या सीमित प्रक्रिया नहीं है| जब आप यह देख लेते हैं (कि आप स्थिर आराम या स्थिर प्रसन्नता की अवस्था में नहीं रह सकते-आपको जीवन ऊर्जा छू लेती है| अब हर पल एक प्रयोग की तरह सामने आता है| और इस प्रक्रिया का कोई संतुष्टिपूर्ण या आरामदायक अंत नहीं है|

Y V Chawla

 

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