मानसिक बेआरामी और मूल ऊर्जा

हम इस वैचारिक ऊहापोह में रहते हैं-‘ कुछ भी नापसंद क्यों हुआ’, ‘दूसरे हमारे साथ सहयोग क्यों नहीं करते’, ‘हर तरफ नकारात्मकता क्यों है’, ‘ क्यों हमारे प्रयासों का अच्छा परिणाम नहीं होता’ इत्यादि| यदि आप इन विचारों को बिना किसी प्रयास के, स्वयमेव ही(शायद आपको कुछ बेआरामी महसूस हो) चुप करा सकते हैं- अब पल पल केवल भौतिक, वास्तविक कार्य ही रह जाते हैं| आप मूल धरातल पर हैं|

नापसंद स्थितियों, मानसिक रूप से परेशान करने वाली स्थितियों की बेआरामी से बचना आपको आरामदायक लगता है| क्या आप नापसंद स्थितियों की बेआरामी से बचने के प्रयास को देख सकते हो? आपने जीवन की ऊर्जा, मूल ऊर्जा को छू लिया है|

DAKOTA

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Y V Chawla

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यह प्रविष्टि psycho spiritual में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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