समस्या-हल की स्वचालित प्रक्रिया

आप समस्याओं या विकट परिस्थितिओं को देखकर उनका हल या उनको टालने या भविष्य में सुरक्षित होने के लिये धार्मिक-आध्यात्मिक क्रियाओं या विचारों का सहारा लेते हो| यह सहारा मन को भ्रमदायक आराम में ले जाता है| कोई भी समस्या या विकट परिस्थिति (जब आपके ऊपर कोई शारीरिक खतरा नहीं है), केवल एक मानसिक बेआरामी है| इस बेआरामी को जैसे है, वैसे ही समाहित करना आपको मूल से मिला देता है| आप समस्या-हल की स्वचालित प्रक्रिया को देख लेते हैं|

Y V Chawla

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