भगवान के अस्तित्व को कैसे स्वीकार करें?

आप भगवान की इच्छा और अपनी इच्छा में अंतर को महसूस करते हैं-मानसिक बेआरामी, मानसिक प्रतिरोध से| जब आप इस बेआरामी, इस प्रतिरोध को बिना किसी विचार या व्याख्या के समाहित कर लेते हैं-दो इच्छाओं का अंतर समाप्त हो जाता है|

दो इच्छाओं का विचार ही गिर जाता है|

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