इस पल के साथ आपका संबंध कुछ और नहीं हो सकता (अपरिवर्तनीय है)

क्रोध, भय, चिंता, घृणा, तनाव, दुख, विचार की ऊहापोह जीवन की अभिव्यक्ति है.
इसी तरह सुख, प्रसन्नता, आनंद, विचार की ऊहापोह जीवन की अभिव्यक्ति है. क्रोध इत्यादि का अर्थ है, ‘जो है’ उसके साथ अस्वीकृति है.
सुख इत्यादि का अर्थ है, ‘जो है’ उसके साथ स्वीकृति है.
उदासीनता का अर्थ है. ‘जो है’ उसकी उपेक्षा.
यह तीनों अवस्थाएं जीवन की अभिव्यक्ति हैं. जीवन इन्हीं के द्वारा चलायमान रहता है.
इसलिये ‘जो है’ (उसके साथ अस्वीकृति, स्वीकृति, उदासीनता ) जीवन की अभिव्यक्ति है.
‘क्या होना चाहिए’ का विचार मन को ‘जो है’ उससे परे कर देता है.
मन इस भ्रम में रहता है कि वो जीवन की अभिव्यक्ति को अपने पक्ष में या वश में कर सकता है या वह किसी अभिव्यक्ति का चुनाव कर सकता है.
ऐसा कोई उपाय नहीं है न ही बच निकलने का कोई रास्ता है.
यह निस्सहायता आपको शून्यता का स्पर्श करा देती है.
आप जीवन का खेल समझने लग जाते हैं.Slide canva 6

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सभी संभावनाएं और प्रतिरोध

हम समझते हैं जैसे कि वस्तुओं की अधिकता से, संबंधों के द्वारा, धार्मिक-आध्यात्मिक विचारों से, भगवान इत्यादि के विचारों के द्वारा स्थिरता पाई जा सकती है, या स्थिर आराम पाया जा सकता है- अगर अभी नहीं तो भविष्य में।

यह तलाश ह्में प्रतीक्षा में रखती है – हम पूर्ण अनुभव या प्रसन्नता को नहीं छू पाते।

ह्म नहीं देख पाते कि हम असमंजस, भय, अनिश्चितता से अपने आपको बचा रहे हैं। मन प्रतिरोध के द्वारा कार्य करता है – ‘यह नहीं जान सकता, यह नियंत्रित नहीं कर सकता’। यह देखना आपको पूर्ण शांति से मिला देता है – सभी संभावनाओं से मिला देता है। जीवन के बारे में सभी प्रश्न गिर जाते हैं।

अब आप स्वचालित धरातल पर आ जाते हो जहां अनिश्चितता, इच्छा आपकी इच्छा की पूर्ति, निश्चितता को प्रतिरोध प्रदान करते हैं|

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क्षमतायें ( Empowerment)

आपकी क्षमतायें अधिक जानने या अधिक वस्तुओं के होने से नहीं बढ़ती बल्कि यह अपने आप बढ़ जाती है-

जब आप यह देखते हैं कि आप कल के भविष्य के, परिणाम के बारे में आज संतुष्ट या निश्चिंत नहीं हो सकते।

जब आप यह देखते हैं के आप गलती करने के भय को हटा नहीं सकते।

जब आप हानि, बेइज्जती, असफ़लता से होने वाली बेआरामी से भाग नहीं सकते।

जब आप यह देखते हैं कि आप किसी भी गणना या प्रक्रिया के द्वारा निर्दोष चुनाव (flawless choice) करने में असमर्थ हैं।

जब आप रोज़मर्रा की मानसिक बेआरामी, खीझ, विवश्ता को  मनोरंजन, नशे, छुट्टियों, धार्मिक-आध्यात्मिक क्रियाओं से ढ़कने के आदी नहीं हो जाते।

ऊर्जा पूर्ण एकत्रित रहती है।

Y V Chawla

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अस्तित्व विस्मय की प्रक्रिया से चलता है न कि केवल गणनाओं और तर्कों के द्वारा

जब आपकी बनाई हुई योजनाएं पूरी नहीं होती तो आपका मन व्याकुल हो जाता है। यह पूर्ण विश्रांति को तब पाता है जब यह देख लेता है कि अस्तित्व विस्मय की प्रक्रिया से चलता है न कि केवल गणनाओं और तर्कों के द्वारा। और आप विस्मय की प्रक्रिया से अपने आप जुड़ जाते हैं जब आप किसी नापसंद स्थिति की बेआरामी से बच के नहीं निकलते।

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Y V Chawla

 

 

स्थिर आराम की तलाश भ्रम है

आप संतुष्ट या स्थिर आराम की अवस्था में नहीं रह सकते| कोई कमी,कोई आवश्यकता, कोई असुरक्षा आपके सामने आ जाएगी| जीवन कोई परिभाषित या सीमित प्रक्रिया नहीं है| जब आप यह देख लेते हैं कि आप स्थिर आराम या स्थिर प्रसन्नता की अवस्था में नहीं रह सकते-आपको जीवन ऊर्जा छू लेती है| 

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भगवान का विचार मन की कार्यविधि है

सत्य या भगवान को जानने के नाम पर मन एक आरामदायक अवस्था की तलाश में ही रहता है। यह मन की सीमा है। वह इससे आगे चाह ही नहीं सकता, जान ही नहीं सकता। मन इस भ्रम में रहता है जैसे सुख दुख को ढ़क सकता है। सत्य को जानने का अर्थ उस तल को देखना है, जहाँ सुख और दुख मित्र और पराये की तरह नहीं हैं अपितु मस्तिष्क को चलाने के लिये विषम ऊर्जा की तरह हैं। मन इस प्रक्रिया से बंधा हुआ है। यह देखना कि इस प्रक्रिया से निकलने का कोई रास्ता नहीं है, आपको असीमित से मिला देता है।

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