तलाश, प्रसन्नता और बहकावा

आप सोचते हैं कि जैसे कोई और या कोई गुरु आदि मानसिक रूप से सुरक्षित, संतुष्ट, प्रसन्न रह रहे हैं और आप असंतुष्ट, असुरक्षित और अप्रसन्न तरीके से रह रहे हैं| —–

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समस्या-हल की स्वचालित प्रक्रिया

आप समस्याओं या विकट परिस्थितिओं को देखकर उनका हल या उनको टालने या भविष्य में सुरक्षित होने के लिये धार्मिक-आध्यात्मिक क्रियाओं या विचारों का सहारा लेते हो| यह सहारा मन को भ्रमदायक आराम में ले जाता है| कोई भी समस्या या विकट परिस्थिति (जब आपके ऊपर कोई शारीरिक खतरा नहीं है), केवल एक मानसिक बेआरामी है| इस बेआरामी को जैसे है, वैसे ही समाहित करना आपको मूल से मिला देता है| आप समस्या-हल की स्वचालित प्रक्रिया को देख लेते हैं|

Y V Chawla

पूर्णता को जानने के लिए, पूर्णता से जुडने के लिए

पूर्णता को समझने के लिए, पूर्णता को जानने के लिए, पूर्णता से जुडने के लिए आपको ‘जो है’ और ‘जो आप चाहते हैं, होना चाहिए’ के बीच में प्रतिरोध को बिना किसी व्याख्या या विचार के समाहित करना होगा|

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मानसिक बेआरामी को टालने का आराम

आप अभी की मानसिक बेआरामी को टालने के लिए कल पर निर्भर कर रहे हो| यह निर्भरता आरामदायक लगती है, आपको बेआरामी को अनुभव करने से बचा लेती है| क्या आप इस निर्भरता, इस आराम को देख सकते हैं, नकार सकते हैं? पूर्ण ऊर्जा एकत्रित हो जाती है| मूल से आपका स्पर्श हो जाता है|
Y V Chawla

असफलता के विचार,अनहोनी की आशंका और स्पष्टता

जब असफलता के विचार, किसी अनहोनी घटना की आशंका, भविष्य की किसी योजना या काम की सोच आपको परेशान करते हैं-आपका मन सक्रिय अवस्था में है| क्या आप देख सकते हैं कि इन विचारों को हटाया या समाप्त नहीं किया जा सकता? इनको हटाने या समाप्त करने या ढ़कने की कोशिश परेशानी को बढ़ा देती है| आप किसी हल को सोच कर अभी संतुष्ट नहीं हो सकते| यह स्पष्टता आपको अनिर्णीत धरातल पर ला कर खड़ा कर देती है| अब जो भी है सकारात्मक ही है, आप सकारात्मकता ही आकर्षित करते हैं|

Y V Chawla

DAKOTA

मानसिक बेआरामी और मूल ऊर्जा

हम इस वैचारिक ऊहापोह में रहते हैं-‘ कुछ भी नापसंद क्यों हुआ’, ‘दूसरे हमारे साथ सहयोग क्यों नहीं करते’, ‘हर तरफ नकारात्मकता क्यों है’, ‘ क्यों हमारे प्रयासों का अच्छा परिणाम नहीं होता’ इत्यादि| यदि आप इन विचारों को बिना किसी प्रयास के, स्वयमेव ही(शायद आपको कुछ बेआरामी महसूस हो) चुप करा सकते हैं- अब पल पल केवल भौतिक, वास्तविक कार्य ही रह जाते हैं| आप मूल धरातल पर हैं|

नापसंद स्थितियों, मानसिक रूप से परेशान करने वाली स्थितियों की बेआरामी से बचना आपको आरामदायक लगता है| क्या आप नापसंद स्थितियों की बेआरामी से बचने के प्रयास को देख सकते हो? आपने जीवन की ऊर्जा, मूल ऊर्जा को छू लिया है|

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Y V Chawla

जीवन कोई परिभाषित या सीमित प्रक्रिया नहीं है

आप संतुष्ट या स्थिर आराम की अवस्था में नहीं रह सकते| कोई कमी,कोई आवश्यकता, कोई असुरक्षा आपके सामने आ जाएगी| जीवन कोई परिभाषित या सीमित प्रक्रिया नहीं है| जब आप यह देख लेते हैं (कि आप स्थिर आराम या स्थिर प्रसन्नता की अवस्था में नहीं रह सकते-आपको जीवन ऊर्जा छू लेती है| अब हर पल एक प्रयोग की तरह सामने आता है| और इस प्रक्रिया का कोई संतुष्टिपूर्ण या आरामदायक अंत नहीं है|

Y V Chawla