अंतहीन प्रक्रिया

आप यह सोचते हैं की आप पूर्ण संतुष्ट, व्यवस्थित तब महसूस कारेंगे, जब आपके पास और धन आ जाएगा, जब जीवन के बारे में, अस्तित्व के बारे में आपके प्रश्नों का उत्तर मिल जाएगा या वह हल हो जाएंगे, जब आपके बच्चे बड़े हो जाएंगे, स्वनिर्भर हो जाएंगे या जब आप अपने काम में किसी उच्च अवस्था तक पहुंच जाएंगे| इस सोच के द्वारा आप भविष्य के आराम को अभी ढूंढ रहे हो|
यह आराम कभी पाया नहीं जा सकता| क्या आप अभी संतुष्ट, व्यवस्थित, पूर्ण अनुभव कर सकते हो-चाहे आप किसी भी अवस्था में हैं-सभी अवस्थाएं मानसिक बेआरामी ही हैं-अगर आप किसी तुरंत शारीरिक खतरे में नहीं हैं|सभी इच्छाएं, सभी समस्याएं मानसिक बेआरामी ही हैं| क्या आप यह देख सकते हैं? यह देखना आपको तुरंत मूल से मिला देता है| अब आपकी इच्छा, आपकी बेआरामी आपकी इच्छा के पूर्ण होने या कुछ भी घटित होने को प्रतिरोध प्रदान करते हैं| यह अंतहीन प्रक्रिया है| आपने जीवन की मूल ऊर्जा (current) को छू लिया है|Slide 38

 

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मानसिक बेआरामी से बच के निकालने का कोई रास्ता नहीं है

आप किसी नापसंद अनुभव, मानसिक बेआरामी, मानसिक तौर पर तकलीफ़देह अवस्था का सामना करने से, उसको सहन करने से, किसी दूसरे के द्वारा, किसी क्रिया, किसी अभ्यास, किसी सिद्धांत के द्वारा नहीं बच सकते | जब तक आप यह नहीं देख लेते कि बच के निकालने का कोई रास्ता नहीं है, आप मूल को नहीं छू सकते|
आप नापसंद विचारों को अनदेखा कर देते या टालने में लगे रहते हो| नापसंद विचारों का बिना किसी व्याख्या के सामना करने से पूर्ण ऊर्जा एकत्रित हो जाती है|
Y V Chawla

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ब्रह्माण्ड एक दूसरे पर आश्रित, एक दूसरे के विरोधी तत्वों द्वारा चलायमान रहता है

असमंजस, विरोधाभास, अस्पष्टता:

Slide 36

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मन विषमताओं के द्वारा ही कार्य करता है

कोई भी उपदेश या क्रिया जो यह वायदा करते हैं की आपको स्थिर आराम, स्थिर प्रसन्नता मिल जाएगी-आपको मूल से दूर कर देते हैं| मन विषमताओं के द्वारा ही कार्य करता है| वस्तुओं की अधिकता से, ज्ञान के द्वारा या किसी अभ्यास से आप मानसिक तौर पर सुरक्षा, निश्चितता को नहीं बांध सकते| इस तथ्य पर ध्यान देने से आप स्वचालित धरातल पर आ जाते हो जहां अनिश्चितता, इच्छा आपकी इच्छा की पूर्ति, निश्चितता को प्रतिरोध प्रदान करते हैं| आप पूर्ण धरातल पर हैं|

Y V Chawla

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मूल प्रतिरोध और स्वचालित धरातल

मूल प्रतिरोध, जिससे जीवन चलायमान रहता है, को देख कर, जान कर आप मूल धरातल को छू लेते हैं| मन इस प्रतिरोध को टाल कर प्रसन्न होता रहता है| टालना, यह सोच कर होता है- अभी विवशता है, कल सब ठीक हो जाएगा या संतोषजनक हो जाएगा; किसी ने जीवन के प्रतिरोध को हल कर लिया है; वस्तुओं, संबंधों की अधिकता के द्वारा, धार्मिक, आध्यात्मिक विचारों या क्रियाओं के द्वारा स्थिर अनुभव या स्थिर आराम पाया जा सकता है| इस टालने को देखना ऊर्जा के द्वार खोला देता है|

d47
कोई भी उपदेश या क्रिया जो यह वायदा करते हैं की आपको स्थिर आराम, स्थिर प्रसन्नता मिल जाएगी-आपको मूल से दूर कर देते हैं| मन विषमताओं के द्वारा ही कार्य करता है| वस्तुओं की अधिकता से, ज्ञान के द्वारा या किसी अभ्यास से आप मानसिक तौर पर सुरक्षा, निश्चितता को नहीं बांध सकते| इस तथ्य पर ध्यान देने से आप स्वचालित धरातल पर आ जाते हो जहां अनिश्चितता, इच्छा आपकी इच्छा की पूर्ति, निश्चितता को प्रतिरोध प्रदान करते हैं| आप पूर्ण धरातल पर हैं|

Y V Chawla

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आपका साहस पूर्ण कदम किसी भी परिस्थिति में सहज रहना है

आपका कार्य किसी कठिन काम को करना या उलझन भरी समस्या को सुलझाना नहीं है| आपका साहस पूर्ण कदम किसी भी परिस्थिति में सहज रहना है| आप निश्चयात्मक रूप से सहज हो जाते हैं जब आप यह देख लेते हैं की कोई भी कठिनाई या समस्या मानसिक बेआरामी ही है (किसी तुरंत शारीरिक खतरे के अतिरिक्त) इस मानसिक बेआरामी को ‘जैसे है वैसे ही’ स्वीकार करना , समाहित करना ही कुंजी है| कार्य या हल स्वयमेव ही सामने आ जाता है या हो जाता है|

Y V Chawla

DAKOTA

DAKOTA

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असफलता की संभावना की बेआरामी

हम असफलता की संभावना की बेआरामी से बचना चाहते हैं | इस बेआरामी से बचा या इसको हटाया नहीं जा सकता | जब हम इस तथ्य को समाहित कर लेते हैं, हर कार्य होशपूर्वक (authentic) और रचनात्मक होता है|

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