पल की आणविक गति

जब आप किसी तथ्य या चुनौती को बिना दोष लगाये, बिना शिकायत किये, बिना आत्मग्लानि के देखते हैं तो उस पल स्वयं ही कर्म उजागर हो जाता है (कुछ करने या न करने के रूप में), यह पल की आणविक गति है।
जब आप दोष लगाकर, शिकायत करके या आत्मग्लानि से देखते हैं तो भी कर्म उजागर होता है, लेकिन आपका ध्यान उस पल में अनुभव की गई कमीं को संतुष्ट करने में लग जाता है।
पल की आणविक गति को देखना अपने आप में आनंद है।
यह आपका पूर्ण से संबंध है।

Y V Chawla

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स्वचालित स्कीम

आप वस्तुओं, संबंधों और विचारों में वृद्धि से आनंद में नहीं आ सकते। आप तभी आनंद में आ सकते हो, जब आप यह देख लेते हो कि ब्रह्माण्ड (आप और जो आपके सामने हो रहा है या आप जो अनुभव कर रहें हैं) एक स्वचालित स्कीम है।

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Fundamental Expressions

साम्यावस्था का आनंद

जब तक आपके कार्य विवशता, ‘करना चाहिये’ और मनोरंजक, आरामदायक (चाहे वो आध्यात्मिक ही क्यों न हों) में बंटे हुये हैं, आप मूल को नहीं छू सकते। आप साम्यावस्था के आनंद को नहीं जान सकते।

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